दिनभर की तपस्या के बाद अब महिलाओं को बेसब्री से इंतजार है तो बस 'चांद' के दीदार का। आइए जानते हैं आज की पूजा का शुभ मुहूर्त, विशेष संयोग और चंद्रोदय का समय।
करवा चौथ 2026: पूजा और सरगी का शुभ मुहूर्त
इस व्रत में समय और मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। आज के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
* सरगी का समय: सुबह 04:48 बजे से 05:39 बजे तक (ब्रह्म मुहूर्त)।
* पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से शुरू।
* चंद्रोदय का समय (नई दिल्ली): रात 08:17 बजे (अलग-अलग शहरों में यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है)।
आज बना है गुरुवार का अद्भुत संयोग
इस साल का करवा चौथ बेहद खास है क्योंकि यह गुरुवार के दिन पड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है।
* जो पति-पत्नी आज के दिन माता लक्ष्मी और श्री हरि विष्णु की भी आराधना करते हैं, उनके दांपत्य जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
* इस शुभ संयोग में पूजा करने से जीवन में आपसी प्रेम, तालमेल और सुख-समृद्धि का वास होता है।
कठिन है निर्जला व्रत, क्या है वीरवती की कथा?
करवा चौथ का व्रत काफी कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे दिन जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती।
* पौराणिक कथा: करवा चौथ की कथा के अनुसार, माता वीरवती ने चतुर्थी का व्रत रखा था, लेकिन भूख-प्यास से व्याकुल होकर उन्होंने चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना ही व्रत खोल लिया था। इसका परिणाम यह हुआ कि उनके पति की मृत्यु हो गई। बाद में अपनी भूल सुधारते हुए उन्होंने सालभर चतुर्थी के व्रत किए और करवा चौथ के प्रताप से अपने पति के प्राण वापस पाए।
करवा चौथ की पूजा और पारण विधि
शाम के समय चांद निकलने से पहले महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की तैयारी करती हैं:
* वेदी की स्थापना: घर के मंदिर या आंगन में वेदी बनाकर शिव परिवार (माता पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी और कार्तिकेय जी) की विधि-विधान से स्थापना की जाती है।
* करवा फेरना: पूजा के दौरान महिलाएं कथा सुनती हैं और एक-दूसरे के साथ 'करवा' फेरती हैं।
* चंद्रमा को अर्घ्य: रात में चांद निकलने के बाद छलनी से चांद और फिर पति को देखा जाता है। इसके बाद चंद्रमा को करवा से अर्घ्य दिया जाता है।
* व्रत का पारण: पति के हाथों से जल और मिठाई ग्रहण करके महिलाएं अपना निर्जला व्रत खोलती हैं।
* आशीर्वाद और उपहार: पूजा संपन्न होने के बाद पत्नी अपनी सास (या घर की बुजुर्ग महिलाओं) के पैर छूकर आशीर्वाद लेती है। वहीं, पति अपनी पत्नी को सम्मान स्वरूप उपहार भेंट करते हैं।

